• Harsh

    चले हैं लोग मैं रस्ता हुआ हूं

    मुद्दत से यहीं ठहरा हुआ हूं

    ज़माने ने मुझे जब चोट दी है

    मैं जिंदा था नहीं जिंदा हुआ हूं

    मैं पहले से कभी ऐसा नहीं था

    मैं तुमको देखकर प्यारा हुआ हूं

    मैं कागज सा न फट जाऊं

    ए लोगो उठाओ ना मुझे भीगा हुआ हूं

    मेरी तस्वीर अपने साथ लेना

    अभी हालात से सहमा हुआ हूं

    कभी आओ इधर मुझको समेटो

    मैं तिनकों सा कहीं बिखरा हुआ हूं

    चलो अब पूछना तारों की बातें

    अभी मैं आसमां सारा हुआ हूं

    मुसलसल बात तेरी याद आई गया

    वो वक़्त मैं उलझा हुआ हूं

    बुरा कोई नहीं होता जन्म से

    मुझे ही देख लो कैसा हुआ हूं

    ज़माने ने मुझे जितना कुरेदा

    मैं उतना और भी गहरा हुआ हूं

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